इस कलम की ताकत तुमने न समझा ये कमबख्त ...
ये बिन चिनगारी के भी अंगार जलाती है .....
ये बिन रोशनी के भी राह दिखाती है ..
ये बिन रास्तो के मुकाम पर पहुचाती है ...
ये बिन चोट के दिल को जालाती है ..
ये बिन आहट आती जाती है ....
ये मासूम को बहलाती है ...
ये दुखी को सहलाती है ...
ये पापी को सजा दिलाती है ..
ये तानाशाह को बेमौत मरवाती है ...
इस कलम की ताकत तुमने न समझा ये कमबख्त ...
ये बिन चिनगारी के भी अंगार जलाती है .....
ये बिन चिनगारी के भी अंगार जलाती है .....
ये बिन रोशनी के भी राह दिखाती है ..
ये बिन रास्तो के मुकाम पर पहुचाती है ...
ये बिन चोट के दिल को जालाती है ..
ये बिन आहट आती जाती है ....
ये मासूम को बहलाती है ...
ये दुखी को सहलाती है ...
ये पापी को सजा दिलाती है ..
ये तानाशाह को बेमौत मरवाती है ...
इस कलम की ताकत तुमने न समझा ये कमबख्त ...
ये बिन चिनगारी के भी अंगार जलाती है .....

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