कुछ लोग छत पर चड़ने के
लिए लिफ्ट का इस्तेमाल करते है
और कुछ लोग सीडियों के सहारे चढ़ते है ..पर चढ़ते दोनों लोग है ..
एक पूरी ताकत लगाकर तो दूसरा आराम से ..
उसी प्रकार जिन्दगी है .. इसमें भी कुछ लोग दूसरो का सहारा लेकर ऊपर जाते है ..
और कुछ लोग अपनी मेहनत से ..
जो लोग मेहनत से ऊपर जाते है उनका बीच में फसना नामुमकिन होता है
लेकिन जो लोग दुसरे के सहारे जाते है वो कब अटक जाए ये कोई पता नही है ..
और सीढ़ी से जाने वाले व्यकित के लिए या फिर मेहनत से जाने वाले व्यकित के लिए
किसी भी तरह की मेहनत के लिए तैयारी होती है ..
वो कस्ट सहने के लिए तैयार रहता है .. वो हर दर्द उठाने के लिए तैयार है तो उसका नीचे गिरना
आसान नही है पर दूसरा व्यकित कब नीचे आ जाये कोई पता नही है और वो फिर भी किसी का सहारा ही लेना चाहेगा .. और जिन्दगी भर बैशाखी के सहारे चलना पसंद करेगा ..
तो क्यों न हम एक बार ज्यादा मेहनत करे और अपने आगे के जीवन में सहारा लेने की कोसिस न करे .........
और कुछ लोग सीडियों के सहारे चढ़ते है ..पर चढ़ते दोनों लोग है ..
एक पूरी ताकत लगाकर तो दूसरा आराम से ..
उसी प्रकार जिन्दगी है .. इसमें भी कुछ लोग दूसरो का सहारा लेकर ऊपर जाते है ..
और कुछ लोग अपनी मेहनत से ..
जो लोग मेहनत से ऊपर जाते है उनका बीच में फसना नामुमकिन होता है
लेकिन जो लोग दुसरे के सहारे जाते है वो कब अटक जाए ये कोई पता नही है ..
और सीढ़ी से जाने वाले व्यकित के लिए या फिर मेहनत से जाने वाले व्यकित के लिए
किसी भी तरह की मेहनत के लिए तैयारी होती है ..
वो कस्ट सहने के लिए तैयार रहता है .. वो हर दर्द उठाने के लिए तैयार है तो उसका नीचे गिरना
आसान नही है पर दूसरा व्यकित कब नीचे आ जाये कोई पता नही है और वो फिर भी किसी का सहारा ही लेना चाहेगा .. और जिन्दगी भर बैशाखी के सहारे चलना पसंद करेगा ..
तो क्यों न हम एक बार ज्यादा मेहनत करे और अपने आगे के जीवन में सहारा लेने की कोसिस न करे .........
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