मै हु तुझसे दूर ...
अपनी आदत से मजबूर ...
रात दिन फेसबुक मै चलाऊ ..
तुझको मै समझाऊ ....
ये सब है तमाशे ..
तेरी इज्जत के है प्यासे ...
इनसे हो जा तू दूर ..
ये करेगे तुझको मजबूर ...
मै हु तुझसे दूर ..
अपनी आदत से मजबूर ..
ये तेरे चेहरे पर है मरते ..
कुछ भी सर्म न करते ...
ये है एक नंबर चालू ..
ये है जंगली भालू ...
इनको जूते से मार ..
इनकी इज्जत उतार ...
मै हु तुझसे दूर ...
अपनी आदत से मजबूर ...
:कृष्णा की कलम से
अपनी आदत से मजबूर ...
रात दिन फेसबुक मै चलाऊ ..
तुझको मै समझाऊ ....
ये सब है तमाशे ..
तेरी इज्जत के है प्यासे ...
इनसे हो जा तू दूर ..
ये करेगे तुझको मजबूर ...
मै हु तुझसे दूर ..
अपनी आदत से मजबूर ..
ये तेरे चेहरे पर है मरते ..
कुछ भी सर्म न करते ...
ये है एक नंबर चालू ..
ये है जंगली भालू ...
इनको जूते से मार ..
इनकी इज्जत उतार ...
मै हु तुझसे दूर ...
अपनी आदत से मजबूर ...
:कृष्णा की कलम से
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