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आपातकाल या
चोरी ?गाँधी परिवार की चोरी : एक सच्चाई
क्या जयगढ़ किले में खजाना छिपाया गया था?
क्या आपातकाल के दौरान ट्रकों में भर के दिल्ली ले जाया गया?
इस सवाल का जवाब उस रहस्य की तरह ही धुंधला है
जिसे जानने के लिए ये सवाल पूछा गया।
लेकिन इस सवाल से कोई इंकार नहीं करता।
बात 1975-76 की है जब देश में आपात काल लागू हुआ था।
उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी। आयकर अधिकारियों ने जयपुर राजघराने के महलों और किलों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। कई सारे किलों की तलाशी के लिए सेना उतारी गई। लंबे समय तक तलाशी चलती रही। उस समय यह मामला खूब चर्चा में रहा। इसका जिक्र गायत्री देवी ने अपनी किताब A princess Remembers में भी किया हैं।
जयगढ़ किले में खजाने के छिपे होने की चर्चा आजादी के बाद भी चलती रही।
इस समय जयपुर राजघराने के प्रतिनिधि राजा सवाई मान सिंह (द्वितीय) और उनकी पत्नी गायत्री देवी थे।
'स्वतंत्र पार्टी' के सदस्य होने के चलते ये दोनों लोग कांग्रेस के विरोधी थे।
गायत्री देवी के हाथों जयपुर से कांग्रेस के प्रत्याशी को लोकसभा चुनाव में तीन बार मात खानी पड़ी थी।
लिहाजा इंदिरा गांधी और कांग्रेस से राजघराने के संबंध बेहद खराब हो गए थे।
1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ तो राजघराने की महारानी गायत्री देवी ने इसका खुलकर विरोध किया।
गायत्री देवी के विरोध का परिणाम यह हुआ कि इंदिरा गांधी ने आयकर विभाग को राजघराने की संपत्ति की जांच के आदेश दे दिए।
महलों और किलों में जांच करने के लिए आयकर विभाग ने सेना की मदद ली।
जयगढ़ किले में खजाना ढूंढऩे के लिए सेना की टुकड़ी ने दिन रात एक कर दिया।
लगभग तीन महीने तक सेना ने जयगढ़ किले को खंगाला।
इस अभियान के समाप्त होने के बाद सरकार ने बताया कि किले से किसी भी तरह की संपत्ति नहीं मिली।
हालांकि बाद में सेना के भारी वाहनों को दिल्ली पहुंचाने के लिए दिल्ली जयपुर राजमार्ग तीन दिन के लिए बंद कर दिया गया, तो इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि सेना के वाहनों में राजघराने का खजाना है।
इस बात की कभी पुष्टि नहीं पाई कि दिल्ली-जयपुर राजमार्ग से सेना के वाहनों में क्या भरकर ले जाया गया?
ये रहस्य अब भी बरकरार है...लेकिन गायत्री देवी ने अपनी किताब में आयकर विभाग की कार्रवाई को स्वीकार किया है।
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