Sunday, 17 February 2013

"अपने आप को पहचानो


·         "अपने आप को पहचानो :"
जिन्दगी आदमी को कहाँ ले जाती है ...
कुछ खुद करता है .. 
कुछ मज़बूरी करवाती है ..
हर इंसान मौज मस्ती करना चाहता है ...
लेकिन हर आदमी को किसी न किसी मज़बूरी की वजह से 
या अपने फर्ज को सोचते हुए ,
अपने आप को कुछ न कुछ करने पर मजबूर करना पड़ता है ..

अगर आदमी को 10 साल भी बिना किसी फर्ज से जीने को मिले या 
फिर बिना किसी कारण से जीना पड़े तो तो वो आदमी एक महान आदमी 
बन सकता है ..
जैसे हमारे देश में बहुत से विश्व बिख्यात संत हुए है ..
उन्होंने क्या किया .? 
अपने आप को सभी चिन्ताओ से मुक्त किया और सिर्फ एक बात पर ध्यान दिया ..
ज्ञान की खोज में लगे या फिर अपने आप की खोज (अस्तित्व) में लगे ..

हर इसान का कोई न कोई लक्ष्य जरुर होता है, और अगर नही भी होता है ..
तो उसे बनाना पड़ता है .. लेकिन बहुत कम लोग ही अपने लक्ष्य तक पहुच 
पाते है बाकी के लोगो को किसी न किसी वजह से अपने लक्ष्य को भूलकर किसी 
दुसरे की चाह को पूरा करना पड़ता है ..
किसी दुसरे की आवश्यकता को पूरा करना पड़ता है ..
पर क्यों हम अपने आप को भूल कर किसी दुसरे की आवश्यकता को पूरा करते है ..
कही किसी के परिवार की वजह होती है तो कही किसी के प्यार की वजह से होता है ..

हम कहते है की शादी न करे तो हम बहुत बड़ी कामयाबी तक जा सकते है ..
क्यों ?? 
इसका भी यही कारण है की हमें ज्यादा से ज्यादा समय मिलता है हम अपने को अकेला समझते है और अपना समय पढने या किसी चीज को सीखने में लगाते है ..
सही है अगर हम अपने आप को अकेला महसूस करेगे तब हमें ज्यादा समय किसी चीज पर खोज करने का, किसी चीज को खोज करने का मिलेगा ...

हम हमारी जिन्दगी पर अपने अधिकार को छोड़कर दूसरो के कारण , या दूसरो के इशारे पर जी रहे है .
यही कारण है की हम अपने आप को भूल रहे है और न चाहते हुए भी अपनी खुसी को छोड़कर कुछ करने पर विबश है ....

हमें अपने आप को स्वतंत्र करना होगा अगर हमें "नाम कमाना है .. शोहरत कमाना है "
"
हमें अपने आप को महान बनाना है "

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