आप लोगों को मै बताया की
नाथूराम गोडसे ने गाँधी को मारा अच्छा किया ..
लेकिन कुछ और सच्चाई है शायद इसे कुछ लोग पसंद करे और कुछ पसंद भी न करे ...
नाथूराम गोडसे जैसा की आप जानते है एक ब्राह्मण थे .. और उनके साथ हत्या में शामिल गोपाल गोडसे, नारायण आप्टे, विष्णु करकरे और विनायक सावरकर को मिलाकर पांच कट्टर ब्राह्मण थे. कुल सात आरोपियो में से दो गैर ब्राह्मण युवक थे.
महात्मा गाँधी कि हत्या में पकडे गए अपराधी महाराष्ट्र के कुछ कट्टर ब्राह्मण युवक थे, जो महाराष्ट्र के कई कट्टरवादी ब्राह्मणों द्वारा शुरू किए गए संघ और हिंदू महा सभा जैसे संगठनो से जुड़े हुए थे.
गाँधी की हत्या के बाद "मुंबई में टोलियो ने सावरकर के घर पर हमला किया और सारे भारत में आर. एस. एस. के कार्यालयों पर भी हमले हुए. "
२ फरवरी १९४८ के दिन केंद्र सरकारने आर. एस. एस. को अवैध संगठन घोषित कर दिया. सरकार द्वारा प्रकाशित घोषणा में कहा गया कि, "संघ की आपतिजनक और हानिकारक गतिविधियो निरंतर चलती रही है.
{{मै इसलिए भी इस तथ्य को प्रस्तुत कर रहा हु की सभी हिन्दू आँख मूंदकर आरएसएस जैसे संघटन पर विस्वास न करे इसमें अच्छे लोग है पर बुरे लोग बहुत है ...}}
लेकिन कुछ और सच्चाई है शायद इसे कुछ लोग पसंद करे और कुछ पसंद भी न करे ...
नाथूराम गोडसे जैसा की आप जानते है एक ब्राह्मण थे .. और उनके साथ हत्या में शामिल गोपाल गोडसे, नारायण आप्टे, विष्णु करकरे और विनायक सावरकर को मिलाकर पांच कट्टर ब्राह्मण थे. कुल सात आरोपियो में से दो गैर ब्राह्मण युवक थे.
महात्मा गाँधी कि हत्या में पकडे गए अपराधी महाराष्ट्र के कुछ कट्टर ब्राह्मण युवक थे, जो महाराष्ट्र के कई कट्टरवादी ब्राह्मणों द्वारा शुरू किए गए संघ और हिंदू महा सभा जैसे संगठनो से जुड़े हुए थे.
गाँधी की हत्या के बाद "मुंबई में टोलियो ने सावरकर के घर पर हमला किया और सारे भारत में आर. एस. एस. के कार्यालयों पर भी हमले हुए. "
२ फरवरी १९४८ के दिन केंद्र सरकारने आर. एस. एस. को अवैध संगठन घोषित कर दिया. सरकार द्वारा प्रकाशित घोषणा में कहा गया कि, "संघ की आपतिजनक और हानिकारक गतिविधियो निरंतर चलती रही है.
{{मै इसलिए भी इस तथ्य को प्रस्तुत कर रहा हु की सभी हिन्दू आँख मूंदकर आरएसएस जैसे संघटन पर विस्वास न करे इसमें अच्छे लोग है पर बुरे लोग बहुत है ...}}
तुझे मैंने अपना
प्यारा समझा ,.
लेकिन तू ही मेरा
हत्यारा निकला ..
मैंने तुझे अपना
सहारा समझा ,.
लेकिन तू ही दम
का मारा निकला ,.
(एसी ही कुछ कहानी
थी उस वक्त गाँधी की .)
जैसे मैंने कहा
की हत्या करने में शामिल सभी लोग ब्राह्मण थे और कट्टरपंथी ब्राह्मण थे .. आरएसएस
के है तो फर्ज ही बंनता है कट्टरपंथी होने का .
पर आप को बताना
चाहता हु की वो पहली बार नही था जब की गाँधी को मारने के लिए नाथूराम गोडसे ने
पहले भी ३ बार कोशिश की थी .. लेकिन सफल
नही हुआ ..
और आपको भी सोचना
चाहिए की गाँधी को मारने में कोई और जाति जैसे सूद्र , या कोई भी वैश्य ने कोसिस क्यों नही की .. क्या
पुरे देश का जिम्मा आरएसएस वालो ने ही ले लिया था ??
क्या दुसरे जाति
वालो को अपने भविष्य की चिंता नही थी ??
क्या अन्य
जातियों वाले पुरी तरह से बेवकूफ थे ??
सभी के सभी लोग
महारास्ट्र के ही क्यों थे क्या देश के किसी अन्य प्रान्त के आदमी को सम्मलित नही
होना था ??
क्या ये हत्या
पुरी तरह से देश के लिए की गई या फिर अपना बर्चस्व जमाने के लिए या फिर देश में
अपनी बात मनवाने के लिए की गई ??
आपने शायद पढ़ा होगा की सन
१९३५ में एक हरिजन यात्रा हो रही थी जिसमे भी बम फेका गया और वो भी गाँधी को
लक्ष्य बनाकर वो भी एक प्रयास था गाँधी को मारने का लेकिन सफल न हो सका .. आप सोचो
की जो लोग गाँधी की हत्या करना चाह रहे थे वो भी देश के लोगो के लिए तो उन्हें
रैली में बम फेकने की क्या जरुरत थी .. आखिर उस समय तो भारत – पाकिस्तान के बटवारे
की बात भी पुरी तरह से संभव नही थी .. , और नही ही ५५ करोड़ रूपये देने की बात थी
फिर क्यों ??? कही अपनी बात को जबरदस्ती से मनवाना या फिर हरिजन यात्रा को ख़तम
करना या फिर हरिजनों के लिए हो रहे बात बुरी लगना ???
शायद आपको पता होगा की
गाँधी ने कहा था की हरि जन मतलब की वे ब्राहमण और नीचे जातियो में भेदभाव नही करते
थे और न होने देना चाहते थे .. और यही कारण रहा होगा की ब्राहमनो को उस समय बेकार
लगा और वे चाहते थे की देश के नीचे तबके के लोग उनके घर में नौकरी करे उन्हें
सामान अधिकार न हो और न ही अन्य जातिओ के लोग ऊपर उठे .. शायद कुछ एसी ही सोच थी
उनकी क्योकि वे एक कट्टर ब्राह्मण थे और आरएसएस के भी थे ..
गाँधी चाहते थे की नीचे
तबके के लोगो को ऊपर उठाया जाए किसी भी तरह से चाहे आरक्षण हो या किसी भी तरह से
जिससे उनका मतलब था की नीचे जाति के किसी ब्याकित को उचे पद पर बैठाया जाए लेकिन
ये बात इन ब्राह्मणों को अच्छी नही लगी ..
और एक तरफ से कानून बनाते
समय भी गाँधी का दबाव रहता था की सबिधान में कुछ येसा न लिखा जाए जिससे की नीचे के
लोग हमेशा उच्च जाति के लोगो के यहाँ नौकरी करते रहे और हल चलाते रहे .. इसलिए भी
एक कारन था की अगर एक उच्चजाती वालो के लिए कानून बनाना है तो गाँधी के नजरो से
दूर ..
क्योकि अगर गाँधी के बात
नही मानेगे तो फिर से कोई आन्दोलन हो सकता है . फिर से सत्ता परिवर्तन भी हो सकता
है ..
आप जानते हो की उस समय उच
नीच का कितना भेदभाव था और गाँधी भी तो अपनी जाति से निकाल दिए गए थे , और आपको भी
पता है की भीमराव अम्बेडकर एक नीच जाति से थे जिससे और लोग नही चाहते थे की इनकी
भूमिका संबिधान बनाने में हो पर गाँधी ने अपने बल पर या यु कहे की अपनी ताकत का
प्रयोग करते हुए इनको शामिल किया था .. और इससे भी कट्टरपंथी ब्राह्मण लोग बहुत
परेशान थे .. ये भी एक कारण हो सकता है गाँधी की हत्या का ....
पर मै भी गाँधी की हत्या को
जायज मानता हु चाहे वो जातिनीति पर हुआ हो या कैसे भी, मेरे जायज मानने का प्रमुख
कारण है की अगर गाँधी चाहते तो भगत सिंह , राजगुरु , सुखदेव जैसे महान सपूतो को
फासी से बचाया जा सकता था . ..
पर मै आज भी ये मानता हु की
आरएसएस एक ब्राहमणों का संगठन है जो कुछ ही फैसले हिन्दूओ के लिए लेता है लेकिन
ज्यादा फैसले सिर्फ अपने लिए या ब्राह्मणों के लिए लेता है ...
अब आप सोचो और बताओ -गाँधी हत्या - देश हित या जातिहित (ब्राहमण हित ) ??
अब आप सोचो और बताओ -गाँधी हत्या - देश हित या जातिहित (ब्राहमण हित ) ??
लेखक : कृष्णा यादव

This comment has been removed by a blog administrator.
ReplyDeletegalat bat
ReplyDeleteaj ..tak bramhno ,,ne hi desh hit me bat kari hai..chahe ,,azad..g..atal g...ya...adavni g...ya history dekh lo....
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