अखिलेश यादव :
समाजवादी पार्टी
या मुलायम और अखिलेश के बारे में तो कुछ कहना ही बेकार है ..
हमारे दोस्त कहते
है की उनके बारे में क्यों कुछ नही कहते हो .....
अब उसके बारे में
हम क्या कहे जिसके लिए यही कहावत सही है " भैस के आगे बीन ....."
हमारे उत्तर
प्रदेश के नौजवानों को अखिलेश जी से बड़ी उम्मीद थी ..
आपको पता होगा की
हमारे देश में सबसे युवा मुख्मंत्री का खिताब हमारे अखिलेश भाई के ही पास है ..
लेकिन हमें लगता
है की उनके पास सबसे ज्यादा घिसी पिटी हुई बुद्धि है ....
अभी तक उन्होंने
कोई येसा बड़ा काम नही किया है जो पुरी तरह से युवाओ और नौजवानों के भविस्य के लिए
हो ..
अरे भला साईकिल
तो धीरे - धीरे चलती है लेकिन इन महाशय की साईकिल भी अब हाथी की चाल में चल रही है
... जो चारा तो बहुत खा रही है लेकिन मुनाफा जनता को बहुत कम दे रही है ...
हमारे उत्तर
प्रदेश में न तो शराब पर बंदी है न गुटखे पर बंदी है और ना ही किसी भी येसे उत्पाद
पर बंदी है जिसपर सरकार को मुनाफा कम मिलता हो ..
हमारी समझ में
कोई ही येसा राज्य है जहाँ पर इतनी आमदनी होती होगी ....
पर चारो तरफ वही
घिसी पिटी हुई योजनाये चल रही है .. चोरी , बलात्कार इन सब मामलो के बारे में तो पूछो ही
मत .. ये घटी नही बल्कि बढ़ी है ..
और रेलवे की
स्थिति भी लगातार बिगड़ी हुई है ...
कोई नया शोध की
तो बात छोड़ो पुराने कामो में भी पानी पड़ रहा है ..
हमारे राज्य के
युवाओं ने बड़े जोर शोर से आस लगाकर वोट दिया था और इतना वोट दिया की छप्पर पाड़
के ,.. लेकिन मिल क्या
रहा है बेरोजगार भत्ता .. अरे बेरोजगार भत्ता नही रोजगार दो .. , बेरोजगार भत्ते में भी चालाकी छुपी हुई है ..
की रोजगार पायेगे नही तो हमारे ही पीछे लगे रहेगे और अगर रोजगार मिल गया तो अपने
काम में मस्त हो जायेगे और चालाक भी हो जायेगे ..
तो एक बार अखिलेश
और अखिलेश के बन्धुओ से निवेदन है की जवानो को रोजगार भत्ता नही रोजगार से .. नई -
नई कंपनियों को उत्तर प्रदेश में आमंत्रित करे ..
अगर जवानी का एक
भी हिस्सा बाकी है मुख्यमंत्री अखिलेश में तो जवानो के लिए येसा काम कर जाए की
उत्तर प्रदेश के ही नही पुरे देश के जवान उनके बारे में जाने .. कुछ सोचे .. और
जिससे अखिलेश के राजनीति का रास्ता और भी खुले ...
लेख बहुत बड़ा है
पर .. अखिलेश का दिल और दिमाग कितना बड़ा है ये मुझे नही मालुम ..
both Akhilesh & Rahul are same i.e. Raj Kunver who have idealistic approach without ground knowledge.
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