स्वयं अपनी रक्षा करो..
चाहे हो नर या नारी ...
नही चलेगी अत्याचारी ||
हथियार उठाओ प्रचंड प्रहार करो...
मन को न निराश करो -मन को न निराश करो ...
स्वयं अपनी रक्षा करो -स्वयं अपनी रक्षा करो.
गाँधी या गाँधी के बंदरो के लिए सम्मान नही है... जो शेर है - दिल से, जान से और शरीर से उन्हें हम सलाम करते है .. क्योकि देश के लिए जग़ हथियार से जीती जाती है अहिंसा से नही "
"और जो हथियार उठाने से डरते है ... उनके लिए अहिंसा प्यारी हो .. पर आज के युग में अपनी माँ -बहन - बेटी बचा के रखना क्योकि सियार घूम रहे है जो अहिंसा क्या होती है नही जानते ...

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