Monday, 31 December 2012

दामिनी (ज्योति पाण्डेय का बलिदान )


1.     {{{{आज उसने हम सब कि आँखे खोलने के लिए बलिदान दिया है }}}}

आज पूरा देश जबाब मांग रहा है ... पर हमारे देश के चलाने वाले बलात्कारी और बेशर्म लोग बैठ कर कह रहे है - "लाख जबाबो से अच्छी है ख़ामोशी मेरी "

याद रहे कि इसके जिम्मेदार कोई और नही हम सब लोग है .....
इसके जिम्मेदार हर युवा है ..
वो हमसे शायद आस लगाये 10 दिन इसलिए रुकी रही कि शायद इस पापी जगत में कुछ दयावान लोग हो जिनसे हमें न्याय मिल जाये पर हर तरफ अँधेरा देखकर उसने भी हमसे आस छोड़ दी और भगवान के पास ही अपने आप को सुरक्षित समझा .......
अब क्या हम लोगो में हिम्मत नही रह गई है कि इन पापियों को सजा दिला सके ..?
आखिर इन महान पापियों को चुनकर हम इसलिए भेजते है जिससे ये हमारे ऊपर गोले और पानी छोड़ सके या फिर इसलिए भेजते है कि हमारे देश की आबरूह जो आज विदेशो तक नीलाम हो रही है बच सके ...........?
क्या आप आज अपने आपको अकेला या निर्सहाय नही महसूस कर रहे है ...?
ये सिर्फ उसी के साथ नही हुआ है याद करो अगर ये आपके किसी ख़ास के साथ होता तो क्या आप चुप बैठते ???
{{{{
आज उसने हम सब कि आँखे खोलने के लिए बलिदान दिया है }}}}

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