Monday, 31 December 2012

दामिनी (ज्योति पाण्डेय ) का बलिदान


आज एक और बलिदान को काले अंग्रेजो ने चुपके से दफनाया है............
आज फिर काले अंग्रेजो ने इतिहास दोहराया है .......
आज फिर हम पर गुलामी का साया है........
आज फिर उस आत्मा ने क्रांति का बिगुल बजाया है ..
आज एक और बलिदान को काले अंग्रेजो ने चुपके से दफनाया है ..........

धरती सो गई जहाँ सो गया , आज हर इंसान सोया है ...
आज फिर किसी माँ का आंचल आसुओ से धोया है ...
दिन ढल गए , चारो तरह रात का साया है ..
आज सब है लज्जित और हिंदुस्तान शरमाया है ..........
आज एक और बलिदान को काले अंग्रेजो ने चुपके से दफनाया है ..........

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