{बच्चो को भगत सिंह बनाये या गाँधी }
आपको यदि बचपन में आम को
सेब बताया जाए तो क्या आप बड़े होकर उसे आम कहोगे ??
यही हाल होता है हमारे देश
के बच्चो के साथ जब उन्हें किसी शैतान को भगवान् बता दो
तो वो उसे भगवान ही मानेगे
चाहे लाख कोसिस करो...
और जब तक वो खुद से अध्यन नही करेगे उसके बारे में तब तक
सच्चाई से कभी नही रूबरू हो सकते ...
अच्छा होगा कि हम लोग अपने बच्चो को झूठ
पढ़ाने कि जगह सच पढाये
और उन्हें डर कर नही हिम्मत से रहना सिखाये......
जो लोग
खुद तो बेव्फुफ़ है और अपने आने वाले बच्चो को भी बेवकूफ बनायेगे ,
उन्हें सच क्या है ये नही
बतायेगे. उनसे कहना -बेटा एक थे बप्पा जिसने चरखा चला कर.
सबको टोपी पहनकर आजादी
दिलाई,
ये मत बताना कि कितने खून बहे, कितने लोग अपने घरो से
निकले और वापस नही लौटे .
कितने माँ कि कोख सुनी हो गई , कितने अपने माँ के दुलारे
सदा के लिए सो गए और किसी को पता भी नही चल .
कितनो ने हँसते हँसते अपने सीने पर
गोली खाई और कितने तो फांसी कि फंदे को चूमा . ..
ये आज़ादी हमें सूत काटने से नही
मिली. बल्कि अंग्रेजो का गला काटने और कटवाने से मिली ..
क्यों उनके महान बलिदानों
को भूलते हो.???
आज हम उनका पुन्तिथि तो भी नही मानते है अच्छी तरह से ..
कुछ के बारे में तो
हमें पता है और कुछ जान बूझकर भुलाये जाते है ..
और हम आजतक भलीभाति से काले
अंग्रेजो कि गुलामी कर रहे है ...
अपने बच्चो को बचपन से
गाँधी नही भगत सिंह बनाये ये प्राथना है
हमारी आप लोगो से जिससे वो अपने आप से और
अपने भविष्य से अच्छी तरह से लड़ सके
और मौका पड़ने पर और देश के काम भी आ सके
.....
बचपन से जो इतिहास गाँधी के बारे मेँ पढ़ाया गया और आजतक पढ़ाया जा रहा है
या
जो गाँधी के बारे मेँ लिट्रेचर उपलब्ध है
वह सब काँग्रेस सरकार द्वारा ही उपलब्ध
कराया गया ।
लोग उसी को पढ़कर भ्रम पाल जाते हैँ ।
धन्य है सोसल मीडिया के संस्थापक सभी
महान पुरुषोँ की असलियत सामने आ रही है ।
हांलाकि बचपन से सुना एवं तथाकथित उपलब्ध
साहित्य (लिट्रेचर) पढ़ने के बाद अविश्वास करना मुशकिल होता है ।
पर मै मूर्ख नही
हूँ मै तो विश्लेषण करूंगा ही ।.
लेखक : कृष्ण कुमार.

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