"नारी की लुटती हुई लाज " (जरुर पढ़े)
हमारी जिन्दगी एक डूबती हुई नाव बनकर रह गई है ..
न तो इसे कोई किनारा मिल रहा है और न ही कोई अच्छा केवट ..
हमारे जिदगी की मसक्कते हमें झुकने पर मजबूर कर रही है .
पर फिर भी हम बिना रूके हुए अपनी हालत पर समझौता कर रहे है ...
अपने आप को लुटते देख रहे है पर हमारे पास वक्त नही है कि हम लूटने वाले को रोके ..
मजबूरन हम चुप होकर अपने काम में लगे हुए है ..
घर से लेकर बाहर तक दलाल लगे हुए है कोई हमें घूरती हुई आँखों से देखता है ...
तो कोई हमें सीटी मारकर इशारा करता है ...
हमारे पास ताकत नही बची है की हम उसे थप्पड़ मारे, हमारे पास वक्त नही है की हम
पीछे मुड़कर राह पर पल्लू खीचते हुए को सबक सिखाये ...
पल्लू छूट जाए वो हमें मंजूर है ,पर हमें अपने काम पर पहुचने के लिए देर हो रही है ..
क्या करे टाइम पर नही पहुचेगे तो डांट मिलेगी ..और फिर वहां भी हमें कोई न कोई परेशान करता
है तो हम चाहते है की क्यों न हम जल्दी पहुच कर अपने केविन(रूम) में बैठ जाए और अपना काम
करना शुरू कर दे जिससे किसी को कुछ कहने का मौका न मिले .. हम उन लोगो से प्यार से न
बोले तो वे हमें बहाना पाकर डाटते है हमें परेशान करने की कोई न कोई वजह खोजते है ...
टीवी से लेकर हर प्रोडक्ट में हमें सब कोई उपभोग करने में लगा हुआ है ..
हमारे जज्बातों की नीलामी की जा रही है ..हमारे सम्मान को नीचा करके दिखाया जा रहा है ..
आज हमें सिर्फ एक शो पीस की तरह उपयोग किया जा रहा है .. कोई हमसे काम नही लेना चाहता
हमारी मदद नही करना चाहता .. बस हमसे और हमारे बदन से अपना प्रचार करने में लगा हुआ है .
अगर हमारे साथ छेड़खानी होती है तो हम अपनी इज्जत को बचाने के चक्कर में और अपने घर
वालो की इज्जत के लिए अपने मुंह को बंद रखना पसंद करते है . और अगर हम इसे सबके सामने
कहे तो कोई बाद में हमसे शादी तो करने के लिए तैयार ही नही होगा ...
हाय क्या यही मेरा सुख है ...
क्या इतना ही मेरा दुःख है ...
क्या मेरे जीवन में आपको कही दिख रहा सुख है ..
हमारा जीवन बन गया नासूर है ...
ये हमारा या भगवान् का कसूर है ...
आज "कृष्णा " कहाँ खो गए है ..
बदनाम हम हो गए है ...
कोई मेरी लुटती हुई लाज बचा ले ...
कोई आज साड़ी से छुपा दे......
{{याद रहे की आपके घर की नारी का यही हाल हो सकता है }}

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